Indian women, they hold their place,
Laws have been made to ensure their grace.
Yet oppression still does reign,
An irony that causes pain.
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सुंदर सुसंस्कृती आज भी, इसका वर्णन है,
आज भी लिहाज़ में 'मैं, आप, और हम है!
पिता आज भी, वही टीन वाला ही खप्पर है,
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ऐ भारत! तूझे कोटि कोटि प्रणाम
रहे गौरव गाथा का सदा जग में प्रमाण,
अंतरिक्ष में तेरा अब तो परचम लहराता,
सूर्य तारों से नयन, अदा से है मिलाता।
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प्राचीन भारत में भी था स्थान,
आज भी अधिकार, कहां उत्थान?
यह है अत्याचार, क्यों?
यह एक विडंबना, पर क्यों?
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एक ही सांचे में उतारी, खूबियां तूने सारी,
बहु, बेटी, बहन, संगनी कमाल, एक ही क्षण सारी!
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जिसकी जिद्द का ना होता था कोई ओर छोर,
प्रेम अंकुरण हुआ, कैसे नाचा मग्न मन मोर,
पाषाण मन बरसी खिलखिलाहटो की झरी,
पहले ही दिन से हो गई वो तो पापा की परी।
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बुराई, भरमाएगी जनाब ए आली,
हर चौराहे, पर चाहे खाएगी गाली,
अंखियों के कौरों में, आ छुप जाएगी,
अंजाने आपकी, प्रिय सी हो जायेगी,
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छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी,
नए दौर में करवा चौथ, अब के नई मनानी,
हम पापा की परियां, हैं तो लिखी पढ़ी जनानी!
लगा लो नौकर चाकर, हुई हम तो घरों की रानी!
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दर्द का दरिया गुजरे वक्त हुआ,
मुस्कुराहटों पर सायों की अभी कमी न थी।
बक्श भी दो इनको, कहीं ये ही ना कह बैठे,
करने वालों ने कभी इनायत की ही नहीं।
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सभी के लिए क्यों नहीं, सर्वदा रास्ता खुला सा हो?
अपने अपने किस्से-कहानियां, बयां खूब करने को!
चलने का हो अधिकार, भले ही कदम कितने ही भटकें हो!
अपना अपना जीवन, अतरंगी - सतरंगी जीने को!
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