दुरुह है तेरा अश्क बहाना,
यूँ दिल है तेरा बाज़ार।
अक्सर आम नहीं मेरी किस्मत,
जिसमें मैं ठहरू और सुस्ताऊं।
जज़्बाती पंख है तेरी धड़कन,
रूहानी इश्क का सोला भड़के।
गर्त हुआ जब रश्म-ए-उल्फत,
प्रेम प्रीत की बन आई किस्मत।
खास गहन है प्रेम का संगम,
धधकती तेरी कहानी है।
संग रंग प्रीत की छा रही है,
बरसों का मन प्यासा है।
गुल खिले, गुलनार सजे, यूँ ऐसा हो,
तेरी आँखों में सारा संसार दिखे।
दुश्वार है तेरा यूँ ही अश्क बहाना,
किस्मत ही अब नया संसार बुने।
संग मीत मिले और होली आए,
खूब रंग और गुलाल उड़ाऊं।
गाल तुम्हारी सिल्की सुंदर,
मैं भी रंग बन के इठलाऊं।
© रजनीश राजन ✍️