रक्षासूत्र: भाई-बहन का Poem by Rajnish Rajan

रक्षासूत्र: भाई-बहन का

त्योहार न्यारा, धागा प्यारा,
भाई-बहन का प्यार है।
थाल में राखी, मिठाई, चंदन,
दीपक मंद मुस्काता है।

सावन की राखी, भाई की कलाई,
मिलाप-दर्शन से मंगलकार्य है।
प्रीत की डोरी, रेशम के धागे,
बहन बांधती भाई में एक विश्वास है।

मंद मुस्कान, नैनों की धारा,
स्नेह-प्यार का संगम है।
राखी बाँध भाई की कलाई,
बहना बहुत हर्षाती है।

आनंदित मुस्कान समाकर इसमें
बहन बाँधती स्नेह के धागे हैं।
यह आनंदित हँसमुख सा रिश्ता,
कच्चे धागों पर प्रतिष्ठित है।

राखी एक विश्वास का धागा,
जो तोड़े से भी न टूट पाता है।
क्लेश, कलह और विषाद त्यागकर,
बहन बाँधती पावन धागे हैं।

राखी एक रक्षा का बंधन,
बहन का यह दृढ़ विश्वास है।
'युगों-युगों तक जीना भैया',
यही तो बहना की पुकार है।

बहना की रक्षा करने हेतु,
भाई भी संकल्पित होते हैं।
गर वक्त कभी आ जाए
भाई चट्टान समर्पित होते हैं।

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