! ! हार कभी ना मानूंगा! ! Poem by Rajnish Rajan

! ! हार कभी ना मानूंगा! !

निःशब्द नहीं मैं सच्चाई से,
मुखर सच्चाई मैं लाऊँगा।
जीत तुम्हारी हो शायद,
पर हार कभी ना मानूँगा।

मैं मृत्यु से भी नहीं डरता,
सच्चाई से मुख क्या मोड़ूँगा?
चाहे लाख विपत्ति आ जाए,
पर हार कभी ना मानूँगा।

सहज नहीं कर्मों को जीना,
फरेब नहीं संकट में रहना।
जीवन इक बड़ी परीक्षा है,
मृत्यु भी क्या एक इच्छा है?

माना गिरा हुआ मैं सिक्का हूँ,
पर सोने का इक इक्का हूँ।
तेरे इठलाने में वो ज़ोर कहाँ,
मैं नदी किनारे इतराता हूँ।

जीत-हार की बातें छोड़ो,
पैमाने में मुझे नाप लो।
मैखाने की तुझे आदत होगी,
मुझे सादा जीवन जीने दो।

माना,
तेरी मंज़िल होगी जीत यहाँ,
तेरे ख्वाबों से मुझे प्रीत कहाँ?
मैं हार के भी इठलाता हूँ,
तेरी हस्ती में वो भाग्य कहाँ?
©रजनीश राजन ✍️

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