।। तेरे नैन - नक्श ।। Poem by Rajnish Rajan

।। तेरे नैन - नक्श ।।

तेरे नैन सुशोभित सुरमों से,
तेरे नैनों में आँसू ना आए;
मेरे नैन सुशोभित सपनों से,
तेरे सपनों में यूँ इश्क़ समाए।

तेरे नैन नखरीले सावन-भादो,
आँसू जो टपके, वो सोना बन जाए;
मेरे नैन नख़ारुष करती अठखेली,
तेरे सपनों में ये समां समाए।

भाल तुम्हारे इस जग में सुन्दर,
जब उसपे एक बिंदी चिपकाए;
तेरे गालों की सुंदर आहट पर,
मैं पागल तब से बैठे धुनी रमाए।

तेरे गालों पर वो सुंदर तिल, प्रिये!
मेरी नजरों से तुम्हें वो तिल बचाए;
हंसी तुम्हारी और संग में डिम्पल,
मानो मेरे दिल को छलनी कर जाए।

प्रिये! भृकुटी तुम्हारी जैसे इंद्रधनुषी,
तेरे नैनो से जब मेरे दो नैना टकराए;
गजब की धड़कन थपक-थपक कर,
मेरे दाएं भौहें को एक संदेशा दे जाए।

तेरे होठों पर 'आँखों वाली मुस्कान',
कोनों पर हल्की लकीर खींच आए;
जब साथ तुम्हारे मैं तेरा हो भटकूं,
दबी होठों से वो कोने फड़क जाए।

तेरी काली जुल्फें बादल बन जाए,
गोरे चेहरे पर जब बादल बरसाए;
हाँ, तेरी सुन्दर नक्श का मूरत, प्रिये!
मेरे दिल में ये मूरत सूरत कर जाए।

©रजनीश राजन ✍️

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