हिंदू नव वर्ष: एक पूर्ण परिक्रमा Poem by Rajnish Rajan

हिंदू नव वर्ष: एक पूर्ण परिक्रमा

चैत्र प्रतिपदा की है ये अद्भुत महिमा,
धरती सूरज की करती पूरी परिक्रमा।
चैत्र मास शुक्ल के सूर्योदय से,
करें नव वर्ष की नव संरचना।

बसंत भी है खूब शबाब में,
खिलता है चैत्र नवरात्रि में।
ब्रह्म देव की अद्भुत महिमा,
धरती करती सूर्य परिक्रमा।

नव वर्ष की प्रथम तिथि से,
शक्ति स्वरूपा मैया दुर्गा की,
इसमें महिमा बड़ी निराली है।
विक्रम संवत की मंगल बेला,
धरा पे चारों ओर हरियाली है।

प्रकृति भी करती अठखेली,
नई पत्तियों और कोपलों से,
करती पूर्ण धरा का श्रृंगार,
चलो करें हम नव शुरुआत।

हिंदू नव वर्ष की शुरुआत,
घर में नए अन्नों का साज।
चैत्र की पहली किरणों से,
सृष्टि की हुई थी शुरुआत।

© रजनीश राजन

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