इस शूरवीरों की धरती को सलाम करो Poem by Pushp Sirohi

इस शूरवीरों की धरती को सलाम करो

इस शूरवीरों की धरती को सलाम करो,
जहाँ हर कण में इंकलाब का नाम करो।
यहाँ शहीदों के सपनों ने
आज़ादी का सूरज उगाया है,
यहाँ हर सांस में तिरंगा
और हर दिल में भारत समाया है।

यहाँ भगत सिंह ने
फाँसी को हँसकर गले लगाया,
चंद्रशेखर आज़ाद ने
कसम को गोली बनाकर निभाया।
यहाँ अशफ़ाक़ उल्ला खाँ ने
वफ़ा को रगों में उतारा था,
और बिस्मिल ने
मौत को भी देश के नाम पुकारा था।

ये मिट्टी सिर्फ मिट्टी नहीं—
ये बलिदानों की निशानी है,
ये शपथों की ज्वाला है,
ये भारत माँ की कहानी है।

यहाँ मंगल पांडे की
पहली हुंकार गूँजी थी,
जिसने गुलामी की नींव
हिलाकर रख दी थी।
यहाँ लाला लाजपत राय की
छाती पर लाठियाँ टूटीं,
पर उनकी आँखों में
आज भी क्रांति की रौशनी कूदी।

इस धरती की हवा में
स्वाभिमान पलता है,
यहाँ दर्द भी
राष्ट्रगान बनकर चलता है।

यहाँ तिलक ने कहा था—
"स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है! "
और उन शब्दों ने
भारत की नसों में आग भर दी,
हर युवा की आत्मा में
सिंह-गर्जना उतार दी।

यहाँ रानी लक्ष्मीबाई ने
इतिहास को तलवार सौंपी,
और दुश्मन की छाती पर
भारत की शान रोपी।
यहाँ झाँसी की रानी
सिर्फ़ एक वीरांगना नहीं—
वो भारत की हर बेटी का
शौर्य-स्वरूप है कहीं।

यहाँ महात्मा गांधी ने
अहिंसा को शक्ति बनाया,
और सत्य ने
साम्राज्य के घमंड को झुकाया।
यहाँ सरदार पटेल ने
टूटे भारत को जोड़ दिया,
और हर बिखरे टुकड़े को
एक राष्ट्र का गर्व सौंप दिया।

यहाँ सुभाष चंद्र बोस ने
गुलामी को चुनौती दी थी,
"तुम मुझे खून दो…"
ये आवाज़ आज भी गूंजती है।
उनका "जय हिंद"
सिर्फ़ नारा नहीं—
ये तो भारत की
धड़कन का इशारा है।

यहाँ सरोजिनी नायडू की
कलम भी क्रांति थी,
महिलाओं की आवाज़ में
आजादी की ध्वनि थी।
यहाँ हर नाम
एक इतिहास बन जाता है,
यहाँ हर बलिदान
ईश्वर का आशीर्वाद कहलाता है।

इसलिए इस धरती को सलाम करो—
जहाँ शहीदों ने
अपने लहू से तिरंगा रंगा है।
यहाँ आज़ादी
किसी सौदे का फल नहीं—
यह तो लाखों दीपों की
जलती हुई गाथा है।

हम आज जिस हवा में सांस लेते हैं
उसमें शहीदों की खुशबू है,
हम आज जिस मिट्टी पर चलते हैं
उसमें राष्ट्र-धर्म की धुन है।

तो जब भी तिरंगा लहराए,
सिर्फ़ देखना नहीं—
दिल में उतार लेना।
क्योंकि ये तिरंगा
किसी एक का नहीं,
ये हर उस शहीद की
अमर पहचान है
जिसने अपना सब कुछ देकर
भारत को भारत बनाया।

इस शूरवीरों की धरती को सलाम करो—
क्योंकि यहाँ
आजादी को सिर्फ पाया नहीं गया…
इसे मंगल पांडे की हुंकार,
लाजपत राय की छाती,
झाँसी की तलवार,
गांधी के सत्य,
पटेल की एकता,
बोस की आग,
और भगत सिंह के बलिदान से
सींचा गया… सजाया गया। 🇮🇳🔥
--पुष्प सिरोही

इस शूरवीरों की धरती को सलाम करो
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