1. शरारत वाली मोहब्बत
मैं तुझे देख कर
सीधा नहीं,
थोड़ा टेढ़ा मुस्कुराता हूँ।
क्योंकि सीधी मोहब्बत सब करते हैं,
मैं शरारत में इज़्ज़त मिलाता हूँ।
तेरी आँखों से बहस करता हूँ,
और हार कर भी जीत जाता हूँ।
मैं छूता नहीं हर बार,
कभी-कभी बस
नज़रों से तुझे सताता हूँ।
— पुष्प सिरोही
2. मोहब्बत, जो हद में शरारत रखे
मैं तुझे पाने की जल्दी में नहीं,
तुझे हँसाने की आदत में हूँ।
तेरी नाराज़गी भी संभाल लेता हूँ,
क्योंकि मैं मोहब्बत
समझदारी में करता हूँ।
मैं तुझे देख कर
सब कुछ भूल सकता हूँ,
पर तेरी इज़्ज़त
कभी नहीं भूलता।
शरारती हूँ,
पर सस्ता नहीं।
— पुष्प सिरोही
3. अगर कोई चाहे ऐसे
मैं तुझे रोकूँ नहीं,
बस तुझसे जलन थोड़ी करता हूँ।
क्योंकि जो दिल से चाहता है,
वो थोड़ा शरारती
ज़रूर होता है।
मैं तुझे भीड़ में देखकर
सीना तान लेता हूँ—
हाँ, ये मेरी है।
क्योंकि मोहब्बत
दिखावा नहीं,
खामोश दावा होती है।
— पुष्प सिरोही
4. शरारती, पर सुरक्षित
मैं वो नहीं
जो रात भर मीठी बातें करे,
और सुबह बदल जाए।
मैं वो हूँ
जो तुझ पर हक़ नहीं जताए,
पर ज़रूरत पड़े तो
तेरे आगे दीवार बन जाए।
मैं शरारत करता हूँ
तुझे हँसाने के लिए,
और मोहब्बत करता हूँ
तुझे सुरक्षित रखने के लिए।
— पुष्प सिरोही
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