मेरे दोस्तों,
एक बार की बात है—
मैं एक सुबह
दो रास्तों के बीच
खड़ा रह गया।
दोनों रास्ते
जंगल की ओर जाते थे,
दोनों पर
धूप की हल्की परत थी,
दोनों में
अपने-अपने सच थे…
और मेरे पास
सिर्फ़ एक चुनाव।
मैं देर तक
खड़ा रहा।
मैंने पहले रास्ते को
दूर तक देखा—
जहाँ तक नजर
मुड़ सकती थी।
वो रास्ता
काफी जाना-पहचाना था,
उस पर
कदमों की आवाज़
पहले से थी।
और दूसरा रास्ता…
दूसरा रास्ता
थोड़ा शांत था,
कम चला गया था,
उसके किनारे
संकोच के फूल थे
और साहस की घास।
मैंने सोचा—
किसी दिन लौटकर
पहला रास्ता ले लूँगा…
पर मैं जानता था—
रास्ते
एक बार छूट जाएँ
तो वापस
उसी तरह नहीं मिलते।
क्योंकि
ज़िंदगी में
"फिर कभी"
अक्सर
"कभी नहीं" बन जाता है।
तो मैंने
वही रास्ता चुन लिया
जिस पर कम लोग चले थे—
जिस पर
मेरे अलावा
ज़्यादा कदमों की
गवाही नहीं थी।
और बस
यही एक फैसला
मेरी कहानी
बदल गया।
उस रास्ते पर
डर भी था,
पर एक अलग ही
रौशनी भी थी।
कभी-कभी
हवा ने कहा—
"वापस लौट जाओ, "
कभी मन ने कहा—
"जोखिम मत लो।"
पर मेरे भीतर
एक आवाज़ थी
जो धीमे से
बार-बार कहती रही—
"अगर आज नहीं,
तो कब? "
मैं आगे बढ़ता गया।
कभी गिरा,
कभी संभला,
कभी अकेला लगा,
कभी खुद पर
गर्व हुआ।
और धीरे-धीरे
वो अनजाना रास्ता
मेरे लिए
घर जैसा बन गया।
अब जब मैं
पीछे मुड़कर देखता हूँ,
तो समझ आता है—
सही रास्ता
कोई नक्शा नहीं बताता।
सही रास्ता
तुम्हारे फैसले बनाते हैं,
तुम्हारी मेहनत बनाती है,
और तुम्हारा हौसला
उसे
सही साबित करता है।
और हाँ…
शायद आने वाले समय में
मैं किसी से कहूँगा—
"एक जंगल में
दो रास्ते थे…
और मैंने
वो रास्ता चुना
जो कम चला गया था।"
और सच मानो,
यही फर्क
सब कुछ बदल गया।
क्योंकि
दुनिया
भीड़ की दिशा में
बहुत तेज़ चलती है—
पर इतिहास
उनका नाम लिखता है
जो अपने कदमों को
अपनी दिशा देते हैं।
तो मेरे दोस्तों,
जब भी जिंदगी
तुम्हें दो रास्तों के बीच
खड़ा कर दे—
दूसरों का रास्ता मत देखना,
अपना साहस देखना।
और अगर दिल कहे
"ये रास्ता कठिन है"…
तो मुस्कुरा देना—
क्योंकि अक्सर
कठिन रास्ते ही
असली मंज़िल तक ले जाते हैं।
— पुष्प सिरोही
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