मोहब्बत जो सुरक्षित बनाए Poem by Pushp Sirohi

मोहब्बत जो सुरक्षित बनाए

1. मोहब्बत जो सुरक्षित बनाए

मैं तुझे चाहूँ इस तरह,
कि तेरा डर कम हो जाए।
मेरे पास होने से
तेरी सांसें आसान हो जाएँ।

मैं तुझे रोकूँ नहीं,
बस तेरे साथ चलूँ।
तेरी हर जीत में ताली बनूँ,
हर हार में ढाल बनूँ।

मैं मोहब्बत में
हक़ नहीं,
हौसला दूँ।
ताकि तू
खुद को खोए बिना
मेरे पास रह सके।

— पुष्प सिरोही

2. अगर प्यार ऐसा हो

मैं तुझे पाना नहीं चाहता,
मैं तुझे सुकून देना चाहता हूँ।
तेरे दिन की थकान
मैं बिना पूछे
अपने हिस्से में लेना चाहता हूँ।

मैं तुझे हर वक़्त नहीं,
हर हाल में चाहता हूँ।
तेरी खामोशी भी समझूँ,
और फिर भी
कुछ न पूछूँ।

अगर प्यार ऐसा हो,
तो शायद
हर प्रेमिका
ऐसा ही साथी चाहे।

— पुष्प सिरोही

3. मोहब्बत, जो इज़्ज़त से भरी हो

मैं तेरी आज़ादी से
कभी डरता नहीं।
क्योंकि जो दिल से चाहता है,
वो क़ैद करना नहीं जानता।

मैं तुझे भीड़ में
खोने नहीं दूँगा,
पर तुझे
अलग भी नहीं करूँगा।

मैं तेरे सपनों को
अपने कंधे पर रखूँगा,
ताकि तू
और ऊँचा उड़ सके।

— पुष्प सिरोही

4. मोहब्बत की परिपक्वता

मैं तुझे रोज़
मीठी बातें नहीं करूँगा,
पर जब दुनिया
तेरी तरफ़ उँगली उठाए,
मैं तेरे आगे
दीवार बनकर खड़ा रहूँगा।

मैं वादा कम करूँगा,
निभाना ज़्यादा।
मैं दिखावा नहीं करूँगा,
पर छोड़कर
कभी नहीं जाऊँगा।

शायद इसे ही
परिपक्व मोहब्बत कहते हैं।

— पुष्प सिरोही

5. जिस तरह मैं चाहूँ

मैं तुझे इस तरह चाहूँ,
कि तू खुद को
और ज़्यादा पसंद करने लगे।
मेरे प्यार से
तेरी पहचान
और गहरी हो जाए।

मैं तेरी हँसी की वजह बनूँ,
पर तेरी मजबूरी नहीं।
मैं तेरे साथ रहूँ,
पर तेरी राह में
रुकावट नहीं।

अगर मोहब्बत हो,
तो बस
ऐसी हो।

— पुष्प सिरोही

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
मोहब्बत शायरियों पर एक नोट ये शायरियाँ किसी को जीतने के लिए नहीं लिखी गईं, बल्कि किसी को सुरक्षित महसूस कराने के लिए लिखी गई हैं। यहाँ मोहब्बत हक़ नहीं जताती, हौसला देती है। यहाँ प्यार डर पैदा नहीं करता, सुकून बनता है। इन पंक्तियों में कब्ज़ा नहीं, कदर है। ईर्ष्या नहीं, भरोसा है। यह मोहब्बत रोकती नहीं— साथ चलती है। बदलती नहीं— स्वीकार करती है। यह उस प्रेम की आवाज़ है जहाँ एक स्त्री खुद को छोटा नहीं करती, बल्कि और मजबूत महसूस करती है। इन शायरियों का पुरुष मालिक नहीं, साथी है। वह आगे नहीं चलता, न पीछे— वह बराबरी में चलता है। यह प्यार रात की तरह शांत है, और भरोसे की तरह गहरा। अगर इन पंक्तियों को पढ़कर किसी के दिल में यह इच्छा जगे कि "काश कोई मुझे भी ऐसे चाहे", तो समझ लेना इन शायरियों ने अपना अर्थ पा लिया। — पुष्प सिरोही
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