जब हम मिलते हैं Poem by Pushp Sirohi

जब हम मिलते हैं

जब हम मिलते हैं,
तो कुछ भी अचानक नहीं होता—
सब कुछ
बहुत धीरे
अपनी जगह पर आ जाता है।

शोर पीछे छूट जाता है,
और हमारे बीच
एक ऐसी ख़ामोशी जन्म लेती है
जिसमें
कहने को कुछ नहीं,
महसूस करने को
बहुत कुछ होता है।

मेरी नज़र
तेरे चेहरे पर नहीं रुकती,
वह उस सुकून पर ठहरती है
जो तेरे पास आते ही
मेरे भीतर उतर जाता है।

तेरी उँगलियाँ
मेरे हाथ को नहीं पकड़तीं,
वे बस
यक़ीन दिला देती हैं
कि मैं सही जगह पर हूँ।

उस पल
ना वक़्त जल्दी करता है,
ना दिल सवाल पूछता है—
बस
साँसें
एक-दूसरे की रफ़्तार
सीख लेती हैं।

मैं कुछ कहने की
कोशिश भी नहीं करता,
क्योंकि
तेरी मौजूदगी
मेरे हर शब्द से
ज़्यादा सच्ची होती है।

जब हम मिलते हैं,
तो मोहब्बत
कुछ साबित नहीं करती—
वह बस
होती है।

और शायद
यही सबसे ख़ूबसूरत
लम्हा होता है।

— पुष्प सिरोही 💫

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