🇮🇳 1) "शहीदों के नाम"
ये देश हवा से नहीं बना,
ये देश भाषणों से नहीं बना—
ये देश बना है
उन लहू की बूंदों से
जिन्होंने तिरंगे को
रंग दे दिया।
किसी ने माँ को छोड़ दिया,
किसी ने घर की हँसी छोड़ी,
किसी ने बचपन का सपना
और किसी ने अपनी कलियाँ तोड़ी।
पर बदले में
हमें आज़ादी दी—
और आज़ादी की कीमत
शरीर नहीं…
रूह देती है।
शहीद मरते नहीं,
शहीद तो
भारत की साँस बनते हैं।
— पुष्प सिरोही
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🕯️ 2) "लाल मिट्टी"
ये मिट्टी लाल है—
क्योंकि इसमें
शहीदों का रक्त मिला है।
ये सिर्फ़ जमीन नहीं,
ये कसम है।
हर बार जब तिरंगा उठता है,
तो शहीदों की आत्मा
हमारे माथे पर
अशीर्वाद बनकर रखी जाती है।
हम चलते हैं
तो उनकी राह पर,
हम जीते हैं
तो उनकी चाह पर।
भारत जिंदा है
क्योंकि शहीद अमर हैं।
— पुष्प सिरोही
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🕯️ 3) "माँ की आँखें"
माँ की आँखें
शहीद को विदा करते समय
रोती नहीं थीं—
वो भारत के लिए
प्रार्थना करती थीं।
क्योंकि माँ जानती थी,
बेटा घर से नहीं जा रहा,
बेटा इतिहास बनने जा रहा है।
आज जब भी
राष्ट्रगान गूँजता है,
तो लगता है
हर शहीद की माँ
आसमान से कह रही है—
"देखो…
मेरा बेटा अमर हो गया।"
— पुष्प सिरोही
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🕯️ 4) "कफ़न नहीं, तिरंगा"
शहीद का कफ़न
कपड़ा नहीं होता,
वो तिरंगे की छाया होता है।
उसकी कब्र
मिट्टी नहीं होती,
वो भारत की सीमा होती है।
जो मरकर भी
देश के लिए खड़ा रहे,
वो इंसान नहीं—
वो युग होता है।
हम आज
जो चैन की साँस लेते हैं,
वो उनकी अधूरी
साँसों का कर्ज़ है।
— पुष्प सिरोही
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🕯️ 5) "अमर शपथ"
शहीदों ने
फाँसी को हँसकर चुना,
गोलियों को छाती पर सजाया,
और अपने हिस्से की जिंदगी
भारत को दे दी।
उन्होंने कहा नहीं—
उन्होंने कर दिखाया।
उनकी चुप्पी
हमारे लिए संदेश है—
"देश के लिए
कभी कम मत पड़ना।"
शहीदों की शपथ
हमारे दिलों की
धड़कन होनी चाहिए।
— पुष्प सिरोही
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🕯️ 6) "रात की राख, सुबह की आज़ादी"
कितनी रातें जली होंगी…
कितने घर उजड़े होंगे…
कितने सपने
आग में पिघले होंगे…
तब जाकर
आज का सूरज उगा है।
तब जाकर
तिरंगा खुलकर लहराया है।
ये आज़ादी
सस्ती नहीं मिली,
ये आज़ादी
शहीदों के दिल से लिखी गई।
— पुष्प सिरोही
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🕯️ 7) "शहीद का पत्र"
अगर शहीद
आज हमें पत्र लिखता,
तो कहता—
"मैं मर नहीं गया,
मैं तुम्हारी रगों में हूँ।
मैं तिरंगे की शान में हूँ,
मैं सीमा के पहरे में हूँ।
बस एक बात कहना—
भारत को कमजोर मत होने देना,
उसकी एकता पर
कभी आँच मत आने देना।"
और हम…
आँखों में आँसू लेकर
सीना चौड़ा कर देते।
— पुष्प सिरोही
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🕯️ 8) "तिरंगे की कीमत"
तिरंगा
कपड़े का नाम नहीं,
ये बलिदान की किताब है।
इसका केसरिया
शहीदों की आग है,
सफेद
उनका सत्य है,
हरा
उनकी आशा है,
और चक्र
उनकी कर्म-गाथा है।
इस तिरंगे को
देखकर समझो—
हमारे पास जो आज है
वो उनकी मौत से बना है।
— पुष्प सिरोही
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🕯️ 9) "नाम नहीं, निशान"
कुछ लोग
नाम छोड़ जाते हैं,
और कुछ लोग
निशान।
शहीद
नाम नहीं छोड़ते—
शहीद
रूह की पहचान छोड़ते हैं।
उनकी कहानी
सिर्फ़ किताबों में नहीं,
वो हर भारतीय
के खून में है।
जो देश के लिए मरे,
उसे मौत नहीं छूती—
उसे अमरता छूती है।
— पुष्प सिरोही
🕯️ 10) "मेरा प्रण— शहीदों के लिए"
मैं प्रण करता हूँ—
शहीदों के सपनों को
ज़ाया नहीं होने दूँगा।
मैं प्रण करता हूँ—
भारत की मिट्टी पर
दाग नहीं लगने दूँगा।
मैं मेहनत करूँगा,
ईमान से चलूँगा,
राष्ट्र के लिए
झुकूँगा नहीं—
खड़ा रहूँगा।
क्योंकि शहीद
हमसे आंसू नहीं,
हमसे चरित्र मांगते हैं।
— पुष्प सिरोही
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